
राजकुमार केसरवानी
*बारा, कौशाम्बी।* कौशाम्बेश्वर संकट मोचन आश्रम ट्रस्ट परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, कालिया नाग दमन, गोवर्धन पूजन, रासलीला, कंस वध और रुक्मिणी विवाह जैसे दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण रसवर्णन किया। संपूर्ण वातावरण हरि नाम संकीर्तन से गुंजायमान हो उठा और श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए। कथा व्यास ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल बाल स्वरूप की चंचलता नहीं, अपितु दिव्य उद्देश्य से युक्त शिक्षाप्रद घटनाएं हैं। कालिया नाग दमन के माध्यम से अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया गया। श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने के प्रसंग में प्रकृति की पूजा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश निहित है। उन्होंने बताया कि जब इंद्र का घमंड तोड़ा गया, तब समाज को यह सीख मिली कि विश्वास केवल शक्ति में नहीं, सच्चे धर्म में होता है। रासलीला के माधुर्य से भरे प्रसंग में आत्मा और परमात्मा के मिलन की अनुभूति कराई गई। वहीं रुक्मिणी विवाह में प्रेम, समर्पण और धैर्य का अनुपम उदाहरण सामने आया। श्रद्धालु भावविभोर होकर कथा का श्रवण करते रहे।
वही सुबह से राष्ट्र हितार्थ हेतु 108 भगवान शिव का पार्थिव शिवलिंग का रुद्राभिषेक हुआ प्रारंभ हो गया जिसमें जनपद के कोने कोने से भक्तों ने रुद्राभिषेक किया।
इस दौरान उपस्थित प्रमुख श्रद्धालु
बाबा बुद्धनदास महाराज (संस्थापक), खत्री बाबा आश्रम महंत जी सेवक दास , शिवाकांत मिश्र ‘रज्जन’, राजू केशरवानी, कौशिक अग्रहरि, अंकित केशरवानी, अंकुर केशरवानी, अंकित सिंह, संदीप सिंह, शुभम केशरवानी, अजित कुमार सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
*कल की कथा*
अगले दिन कथा में श्रीकृष्ण-शिशुपाल वध, उद्धव संवाद, सुदामा चरित्र और श्रीकृष्ण का लोकप्रयाण जैसे भावपूर्ण प्रसंगों का श्रवण होगा।


