
राजकुमार केसरवानी
*बारा, कौशाम्बी।* ऐतिहासिक स्थल कौशाम्बी स्थिति कौशाम्बेश्वर संकट मोचन आश्रम ट्रस्ट परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार को भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन श्रद्धा और भक्ति की अविरल धारा आश्रम परिसर में बहती रही। सुबह से ही श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचने लगे और जैसे-जैसे दिन चढ़ा, भीड़ उमड़ती गई।
इस अवसर पर राष्ट्र कल्याण और जनमंगल की कामना के साथ 108 पार्थिव शिवलिंगों का रुद्राभिषेक विधिवत प्रारंभ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चारण और ओंकार की गूंज से समूचा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प आदि अर्पित कर भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया। यह आध्यात्मिक दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय रहा।
*अंतिम दिन की कथा में छाया भक्ति भाव*
कथा के सातवें व अंतिम दिन व्यासपीठ से भगवान सुदामा चरित्र ,श्रीकृष्ण के वियोग प्रसंग, उद्धव संदेश और श्रीकृष्ण के गोलोकवासी होने की मार्मिक कथा सुनाई गई। कथा सुनते-सुनते कई श्रद्धालु भावविभोर होकर अश्रुपूरित हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र केवल कथा नहीं, जीवन जीने की कला है।
गुरुवार को विशाल भंडारा, सभी श्रद्धालुओं को आमंत्रण
समापन अवसर पर आश्रम के संस्थापक पूज्य बाबा बुद्धनदास महाराज, खत्री बाबा आश्रम के महंत सेवक दास, शिवाकांत मिश्र ‘रज्जन’, राजू केशरवानी, कौशिक अग्रहरि, अंकित केशरवानी, अंकुर केशरवानी, अंकित सिंह, संदीप सिंह, शुभम केशरवानी, सुनील दुबे, रवि अग्रहरि, रमेश पाल, अजित कुमार समेत सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को भव्यता प्रदान की। आश्रम व्यवस्थापकों ने जानकारी दी कि गुरुवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है, विशाल भंडारे के आयोजन के साथ वार्षिकोत्सव कार्यक्रम सम्पन्न होगा ।


