नीली रोशनी से जगमगाया बेस अस्पताल; विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर ‘रोशनी सोसाइटी’ ने जगाई अलख*

राजकुमार केसरवानी
हल्द्वानी

विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के अवसर पर नेशनल ट्रस्ट में पंजीकृत संस्था ‘रोशनी सोसाइटी’ द्वारा संचालित जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (DDRC), नैनीताल के तत्वावधान में एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बेस अस्पताल हल्द्वानी स्थित कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों, उनके अभिभावकों और विशेषज्ञों ने समाज में समावेशी बदलाव का संकल्प लिया।

*मुख्य अतिथियों का संबोधन:*

कार्यक्रम के *मुख्य अतिथि जिला समाज कल्याण अधिकारी (नैनीताल) विश्वनाथ गौतम एवं विशिष्ट अतिथि सहायक सी.एम.ओ. व दिव्यांग कोऑर्डिनेटर डॉ. श्वेता भंडारी, सहायक समाज कल्याण अधिकारी राहुल आर्या रहे*। मुख्य अतिथि गौतम ने दिव्यांगजनों के कल्याण हेतु सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी। डॉ. श्वेता भंडारी ने ऑटिज्म को समझने और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने पर बल दिया।

*विशेषज्ञों के विचार*:

*प्रारंभिक हस्तक्षेप (Early Intervention)*:

*स्पेशल एजुकेटर विनीता वर्मा* ने बताया कि ऑटिज्म के लक्षणों को शुरुआती अवस्था में पहचानना क्यों जरूरी है। सही समय पर हस्तक्षेप से बच्चों के विकास में क्रांतिकारी सुधार लाया जा सकता है।

*सामाजिक स्वीकार्यता*:

*रोशनी सोसाइटी के सचिव एवं ऑटिज्म अभिभावक गोविंद मेहरा* ने कहा कि समाज को ऑटिज्म के प्रति अपनी सोच बदलने की जरूरत है ताकि ये बच्चे सम्मान के साथ जी सकें।

*अनुभव साझा किए*:

*अभिभावक और संस्था के सदस्य कैलाश जोशी* ने अपने निजी अनुभवों के माध्यम से बताया कि कैसे निरंतर प्रयास और धैर्य से इन बच्चों को समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के योग्य बनाया जा सकता है। उपाध्यक्ष हेमा परगाई द्वारा अभिभावकों के सश्क्तीकरण व् बच्चों के अधिकारों के लिए अपने विचार रखे गये।

*रोशनी सोसाइटी का सफर:*

संस्था की *अध्यक्ष शिवानी* पाल ने वर्ष 2011 से अब तक ऑटिज्म जागरूकता के क्षेत्र में किए गए कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस तरह समाज में इस विषय पर समझ बढ़ी है। अंत में उन्होंने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

*नीली रोशनी से समां हुआ रोशन*:

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘लाइट इट अप ब्लू’ (Light It Up Blue) अभियान रहा। *ऑटिज्म जागरूकता के अंतरराष्ट्रीय प्रतीक के रूप में बेस अस्पताल के मुख्य भवन को नीली रोशनी से जगमगाया गया*। इसका उद्देश्य समाज को यह संदेश देना है कि ऑटिज्म से प्रभावित बच्चे हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं।

*प्रतिभाग*:

कार्यक्रम में लगभग 80 से 100 विशेष बच्चों और उनके ममता धामी, विनीता पाण्डेय, नीरज पांडे सहित शहर के कई गणमान्य व्यक्तियों निर्भय पाल, शिवांगी पाल, पी.के जोशी , सरला जोशी , और कई अन्य बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लेकर इस मुहिम को अपना समर्थन दिया।

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